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Nilgaye Se Faslon Ko Kaise Bachaye नील गाय रोजड़ा से फसलो को कैसे बचाये
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आज हम जानेंगे की नील गाय रोजड़ा क्या है और इससे कैसे कैसे फसलो को बचाया जा सकता है ( Nilgaye se faslon ko kaise bachaye ) और इसमे शासन की क्या भूमिका है।
नील गाय बरसों से किसानों की फसलो को बर्बाद करती आ रही है। लाखों किसान नील गाय यानि रोजडे के आतंक से परेशान हो रहे है।आज यदि किसानों का कोई सबसे बड़ा दुश्मन माने तो वो नील गाय है। किसान बड़े जतन कर के hybrid बीज बोता है और पानी की कमी होते हुए भी 10 से 12 बार सिंचाई कर के अपनी फसल को बड़ी करता है।
लेकिन एक रात में ही सब की गयी मेहनत और हजारों की लागत पर नील गाय बर्बाद कर देती है। बेबस किसान को बरसते पानी और कड़ाके की सर्दी में रात रात भर खेतो की रखवाली करनी पड़ती है। ऐसे में किसान कई तरीके से अपनी फसल को बचाने के जुगाड़ करता है।
नील गाय (रोजड़ा) सामान्य परिचय:–
Nilygaye नील गाय को अँग्रेजी में Blue bull और ग्रामीण क्षेत्रो में रोजड़ा भी कहा जाता है।इसके नाम के पीछे गाय शब्द लगा है लेकिन ये गाय की प्रजाति में नही आती है। ये मृग यानि हिरण की प्रजाति में आती है।
नील गाय का आकर एक घोड़े के सामान होता है। ये रंग में मादाएं भूरे रंग की और वयस्क नर हलके नीले रंग के होते हे। नर में छोटे सिंग होते हे । इनका अनुमानित वजन 250 किलो तक होता है।
एक मादा नील गाय जुड़वाँ बच्चे पैदा करती है। इसकी प्रजनन शक्ति काफी अच्छी होती है।घास के अलावा ये पेड़ पौधों की पत्तियां फूल और फसले भी बड़ी चाव से खाती है।
इसकी एक ख़ासियत ये भी है की ये बिना पानी पिए बहुत से दिनों तक रह सकती है। नीलगाय रोजडे की देखने और सूंघने की शक्ति ज्यादा होती है। लेकिन सुनने की शक्ति कम होती है। ये अधिकांश झुंडों में ही रहते है।
दिन के समय झाड़ियों में और हलके जंगलों में आराम करती है। और रात के समय में फसलो पर धावा बोलती है। ये फसल को खाने के साथ साथ उसमे लौटना पैरो से खोदना और 20 25 के समूह में फसल पर बेट कर बर्बाद करती है।
नील गाय को खेतो से दूर भागने के ग्रामीण तरीके:-
1 काटेदार तार बाउन्ड्री:-
काफी किसान अपने खेतो पर कांटेदार तार से बाउन्ड्री करते है।लेकिन वो सिर्फ कुछ ही विशेष क्षेत्र पर या विशेष फसल जैसे अफ़ीम, सब्जियां,मेथी,लहसुन आदि की करते है । क्यों की तार की बाउन्ड्री काफी महंगी होती हे 20 आरी में खम्भे और तार की बाउन्ड्री का खर्च लगभग 40 हजार तक पहुँच जाता है। जिससे निम्न वर्ग के किसान भाई नही कर पाते है।
इसके अलावा कई किसान दोस्त अपने खेत पर पुरानी साड़ियों से भी दीवार बना कर रोजड़ो से फसल को बचाते है। 90%तार फ़िक्सिंग नीलगायों से फसल को बचाने में सफल तरीका माना जाता है। और मेरी राय में यदि बाउन्ड्री तार की जाली वाली हो तो सबसे ज्यादा सुरक्षित होती है । उसमे नीलगाय के साथ साथ जंगली सूअर से भी फसल को बचाया जा सकता है।
सोलर पावर फेंसिंग से फसल की सुरक्षा कैसे करे यहाँ पढ़े।
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2 दवाइयों के प्रयोग:-
जैसा की मैने आपको पहले नीलगाय के सामान्य परिचय में आपको बताया की नीलगाय रोजडे की सूंघने की शक्ति काफी अधिक होती है। इसी को ध्यान में रख कर मार्केट में कई रासायनिक दवाइयाँ भी उपलब्ध हे जो की खेतो और फसलो के आसपास छिड़काव करने से उसकी गन्ध से नीलगाय आपके खेतो में नही आएगी।
इनके अलावा कुछ देसी तरीके से भी घर पर दवाई बना कर फसल की सुरक्षा कर सकते है, जैसे की नीलगाय के गोबर का पानी के साथ मिश्रण कर के फसल पर एक मीटर चारों तरफ छिड़काव कर के।
फिनाइल की गोलियां खेतो के मेड पर बिखेर के या सल्फास की गोलियों को कपड़ों में लपेट कर रखने से *ये तरीका खतरनाक हो सकता है। क्यों की पशु और मनुष्यों पर इसका असर होता है।
फिनाइल के गोल को एक लीटर पानी में डाल के पंप से स्प्रे भी कर सकते है। गधो के गोबर, मुर्गियों की बिट, गोमूत्र,नीम की पत्तियों का गोल,बी एस सी पाउडर को मेडो पर बिखेर कर और लहसुन के गोल बनाकर उसमे नीम की पत्तियों और धतूरे का रस मिला कर भी उसकी गंध से नीलगायों को फसलो से दूर रखा जा सकता हे। लेकिन उसका असर केवल उसकी जब तक गंध रहेगी तब तक ही असर करता हे। गन्ध का असर 20 से 25 दिन तक रहता हे ।
3 पटाखे आतिशबाजी:-
बहुत सारे किसान दोस्त रात में ज्यादा आवाज़ और धमाका करने वाले फटाके फोड़ कर उन्हें डरा के भी भगाते है। फटाखें की तेज़ रोशनी और आवाज़ के साथ साथ बारूद की गंध से भी नीलगाय भाग जाती है।
4 इलेक्ट्रानिक उपकरण:-
निलगयो से फसलो की सुरक्षा के लिए कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से भी करते है जैसे खेतो पर बल्ब लाइट लगा कर, चमकदार लाइट सीरिज़ बंद चालू होने वाले छोटे छोटे बल्ब लगा के ।
इसके अलावा चारों और लाइट देने वाला यंत्र 5 मिनट के अंतराल में अलार्म बजाने वाला सर्किट लगा के भी कई इलाकों में फसलो की सुरक्षा की जा रही है।
5 काक भगोडा:-
काफी पुराने समय से ही किसान अपने खेतो की रखवाली के लिए काक भगोड़ा का उपयोग करता आया है लेकिन अब उसका उपयोग नीलगाय को भगाने के लिए भी किया जा रहा हे। अब कुछ आधुनिक तरीके से काक भगोड़ा बनाया जा रहे हे जिसमे सफ़ेद कपड़े पहना कर सर को मिट्टी के गड़े में 2 आँखो जैसे छेद कर के उसमे लाइट लगा दी जाती हे जिससे रात में वो नीलगाय को आदमी जैसा लगे और उस से डर के नीलगाय खेत में ना आयें
6 इन पोधों का मेडो पर रोपण करे:-
करौंदा,जैट्रोफा,जंगली तुलसी,खस,जिरेनियम,अलसी,पामारोजा जैसे पोधों को खेत की मेड पर लगाने से भी नीलगाय के नुक्सान से बचा जा सकता है।
7 सफेद प्लास्टिक बेग से :-
मित्रों जब भी आप रोजडे को भागने जाये तो साथ में एक सफ़ेद रंग का प्लास्टिक बेग यानी यूरिया खाद् का खली कट्टा ले जाये उसे लकड़ी के लंबे ढंडे में डाल के झंडा बना ले और फिर उसे हिलाते हुए उन्हें भगाए ।उस से भी नीलगाय डर के भाग जाती है।
*शासन की भूमिका*
अभी तक निल गाय रोजडे के ऊपर कोई विशेष कानून या योजना नही बन पायी हे जिससे किसानों को पूरी राहत मिल सके । कई जिलों और राज्यों से शासन को आवेदन भी दिए गए है।
2010 से पहले नीलगाय से हुए नुक्सान को वन विभाग वाले देखते थे लेकिन सन् 2010 के बाद सर्वे और मुआवजा का काम राजस्व विभाग के पास आ गया है।
2010 के बाद लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत राजस्व विभाग में पहले पटवारी नुक्सान का निरीक्षण कर के तह सील दार को रिपोर्ट बताने के बाद तहसील लेवल पर राशि का भुगतान होता है।जिसमे 25%से अधिक फसल के नुक्सान पर जाँच दल की रिपोर्ट के बाद मुआवजा मिलता है।
लेकिन अभी तक ना तो ज्यादा किसानों ने आवेदन किया हे और ना ही मुआवजा ले पाये है।
क्या नीलगाय को मार सकते है ?
वैसे तो किसान नीलगाय को मारता नही हे क्यों की उसके पीछे गाय शब्द जुड़ा हुआ है। यदि हम कानून की बात करे तो नीलगाय को मारना गैर जमानती जुर्म है। क्यों की निल गाय को वाइल्ड लाइफ protection act 1972 की अनु सूची 4 में शामिल किया हुआ है ऐसे में यदि निल गाय को खेतो से भगाते वक्त वो घायल या मर जाती है तो वो अपराध माना जायेगा जब तक नीलगाय को नही मारा जा सकता हे जब तक व मानव के लिए ख़तरा न हो इसके लिए भी आपको एस डी एम के पास लिखित में आवेदन कर के आज्ञा लेनी होती है।
आपकी राय क्या है ?
क्या आपके पास किसानों के हित में कोई योजना है?
यदि कोई भी राय या उपाय हो तो नीचे comment में जरूर लिखे ।
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आपका अपना किसान दोस्त ____
Or bhi acchi acchi jankariya bhejte rhe dost
Verry nice information sir g
धन्यवाद दोस्तों
मै अजीत सिंह निवासी ग्राम चनहर पोस्ट भैसा बाजार जनपद गोरखपुर जो कि जो कि कम्प्यूटर इन्जिनियर हूॅ तथा अब मै खेती करना चाहता हूॅा मेरे पिता जी निलगाय से बहुत परेशान रहते हूॅा मेरी खेती पुरी तरह से ये आवारा पशु व निलगाय खा जाती हैा यहा तक की फसल को उगाने के लिए जितनी भर्ती लगी है उतनी भी नही निकलपाती हैा मै उन्न्त किश्म की खेती करना चाहता हूॅ लेकिन निलगायो तथा आवारा पशुओं के डर से नही करता हॅा इसके लिए सरकार को कम पैसें में तर बाड की व्यवस्था करवाना चाहिए ताकि व्यक्यिों को गांव से शहर को भागना बंद हो जाय तथ्ाा ज्यादा से ज्यादा लोगो को रोजगार का स़जन प्राप्त हो सके साथ ही साथ खेती के लिए जो आवश्यकता जैसे बीज, पानी, दवा आदि लगने वाले खर्च को सरकार की तरह से प्रोत्साहन के रूप में कुछ खर्चे उठाने चाहिए मै उ0प्र0 सरकार का बहुत आभारी रहूगां मेरा मो0 नं0 9415640234
नीलगाय को माँर देना चाहिए,,,,